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                        खंड “A”  Section “A”

निम्नखंड A से एक विषय पर लगभग 250 शब्दों में निबंध लिखिए I(50 अंक)

Write an essay, choosing one from the following section A in about 250 words. (50 Marks) 

  1.    Sanitation programs are only slogans

      स्वच्छता कार्यक्रम केवल नारे होते हैं

  1.    Democracy is the best form of governance

      लोकतंत्र शासन का सबसे अच्छा तरीका है

  1.     Space programs are meaningless in a developing country like India

भारत जैसे विकाशील देश में अंतरिक्ष कार्यक्रम बेमतलब है

 

                         खंड “B”  Section “B”

Write a precis in one third of the given words. 25 Marks

In Varanasi last week, Prime Minister Narendra Modi said that those who disrupted Parliament on the demonetisation issue were trying to rescue the corrupt and compared their action to Pakistan giving cover fire to terrorists to cross the border. Pause for a moment on what the PM said, there is a dispiriting pattern that involves his party and government. From the time it swept to power with a decisive mandate two and a half years ago, to the present moment just days away from a new year, the government has often sought to stave off criticism by labelling any disagreement with its positions and policies as anti-national and pro-Pakistan.

In retrospect, a till-then little-known Bihar BJP leader, Giriraj Singh, may be credited with setting the tone and giving the cue when, amid the 2014 campaign, he exhorted all those opposed to Candidate Modi to go to Pakistan. In 2015, in the middle of another heated campaign, this time for Bihar, party president Amit Shah famously claimed that should the BJP lose in the state, firecrackers would be burst across the border. If you must eat beef, go to Pakistan, said Minister Mukhtar Abbas Naqvi. MP Yogi Adityanath wanted to despatch Shah Rukh Khan to Pakistan when the actor spoke of rising intolerance in the country. And more recently, the government alleged that questioning its surgical strikes against Pakistan was lending succour to the enemy. Common to all these episodes is the same message: A government with a decisive majority behaves in insecure and obsessive ways. Of course, political rhetoric — not just here but across the world — taps into the idea of an enemy, real or imagined, within and without, to electorally encash a sense of siege. Yet, at the same time, it is also true that the 2014 vote for the Modi-led BJP was a more complicated thing. It was not just about polarisation, but also about hope and affirmation. By labelling all critics and opponents as enemies of the “nation”, therefore, the BJP-led government at the Centre gravely lets down its own rich and layered mandate.

But more is at stake here than just the image of the BJP and its government’s (mis)reading of its mandate. Its nervous tic on Pakistan is also taking a systemic toll. It means that debates on crucial issues, such as demonetisation, are abbreviated, if not still-born. The relationship between government and Opposition looks headed into a dead-end. By alienating the Opposition even before talking to it, the government is making it more difficult for Parliament to function, and in the process, given its ambitious agenda, as on the GST, scoring a massive own goal. The government must realise and acknowledge an obvious and crucial difference: Sulking, not talking, and surgical strikes may be options vis a vis Pakistan. With the Opposition at home, there is no way out of the more mundane give and take.

                                                    अथवा

दिए गए शब्दों का एक तिहाई  में सारांश लिखें।  25 अंक

पहली नजर में इसमें कोई नई बात नहीं लगती। पृथ्वी, आकाश और नाग से लेकर अग्नि तक भारत कई तरह की मिसाइलें बना चुका है। उन सबके परीक्षण कामायाब रहे हैं और कम से कम मिसाइल व रॉकेट तकनीक के क्षेत्र में भारत की महारत पर किसी को कभी शक नहीं रहा। लेकिन सोमवार को हुआ अग्नि-5 का परीक्षण एक अलग महत्व रखता है। ताजा परीक्षण के बाद भारत उन पांच देशों के साथ खड़ा हो गया है, जो इंटर-कांटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल बनाने की क्षमता रखते हैं। अग्नि-5 मिसाइल 5,000 से 5,500 किलोमीटर तक मार कर सकती है। यानी इस लिहाज से यह पूरे एशिया और यूरोप व अफ्रीका के कुछ हिस्सों तक मार कर सकती है। वैसे चीन के कुछ विशेषज्ञों ने कहा है कि अग्नि-5 की वास्तविक क्षमता 8,000 किलोमीटर तक हो सकती है, लेकिन रक्षा मंत्रालय ने इसे 5,500 किलोमीटर ही कहा है। हालांकि ताजा परीक्षण 2,500 किलोमीटर की रेंज पर निशाना साधकर किया गया है, जबकि इसकी क्षमता कहीं अधिक है। परीक्षण कितना सफल रहा, इसे इससे समझा जा सकता है कि मिसाइल ने 2,500 किलोमीटर की दूरी सिर्फ 19 मिनट में तय कर ली। परमाणु बम की क्षमता वाली अग्नि-5 का कामयाब परीक्षण यह संदेश भी देता है कि भारत अब अपनी रक्षा आवश्यकताओं को पाकिस्तान के संदर्भ में ही नहीं देख रहा, बल्कि अब वह उससे कहीं आगे बढ़कर सोच रहा है। यही रास्ता है, जो हमें विश्व शक्ति बनने की ओर ले जाता है।

अग्नि-5 के इस परीक्षण को मिसाइल तकनीक व नियंत्रण संधि से भी जोड़कर देखा जाएगा। इस साल अक्तूबर में ही भारत इस संधि में शामिल हुआ था। इसके पहले तक जब भारत कोई मिसाइल परीक्षण करता था, तो पश्चिमी देश उसका विरोध इस बिना पर करते थे कि वह बिना मिसाइल संधि पर दस्तखत किए परीक्षण कर रहा है। हालांकि इस संधि में शामिल होना न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप में शामिल होने जितना कठिन भी नहीं था, जहां चीन उसका रास्ता रोककर खड़ा है। कुछ अन्य कारणों से इटली ने जरूर एक बार भारत को इसमें शामिल होने से रोका, अन्यथा भारत के लिए कोई बाधा थी ही नहीं, क्योंकि चीन अभी तक इस संधि में शामिल हुआ ही नहीं है। भारत अब बिना रोक-टोक इस तरह की मिसाइल तकनीक विकसित कर सकता है, बल्कि संधि के सदस्य देशों से उनकी तकनीक ले भी सकता है या उन्हें तकनीक दे भी सकता है। एक समय था, जब इस संधि पर दस्तखत न करने के कारण भारत को रूस से मिसाइल तकनीक हासिल करने से रोक दिया गया था। भारत ने खुद इसकी तकनीक विकसित की, इसमें बहुत कुछ हाथ उस रोक का भी था।

मिसाइल तकनीक के मामले में भारत की कामयाबी हमें हैरत में भी डालती है और गौरव बोध भी देती है, लेकिन कुछ सवाल भी खड़े करती है। इतनी उन्नत तकनीक विकसित करने वाला हमारा देश छोटी-छोटी रक्षा तकनीक के मामले में क्यों दूसरे देशों का मुंह देखता है? क्यों हम आज भी दुनिया के सबसे बडे़ हथियार आयातक बने हुए हैं? हम आकाश से मार करने वाले एक से एक मिसाइल बना रहे हैं, लेकिन छोटी तोप और मशीनगन तक के मामले में हमें दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ता है। यहां तक कि हमें इजरायल जैसे छोटे देशों तक से हथियार खरीदने पड़ रहे हैं। मिसाइल और रॉकेट तकनीक के क्षेत्र में हमने जो सफलता हासिल की है, उसे रक्षा के दूसरे क्षेत्रों तक कैसे ले जाया जाए, यह हमारी सबसे बड़ी चुनौती है। रक्षा सामग्री के मामले में आत्मनिर्भर न होना एक ऐसी बाधा है, जो विश्व शक्ति बनने के हमारे संकल्प का रास्ता रोक सकती है।

 

                            खंड “C”  Section “C”

  1. Write a letter to a newspaper editor to express concern regarding the noise created in late night public functions.

25 marks

 

  1. सार्वजनिक कार्यों में देर रात संगीत पर शोर की समस्या को प्रकाशित करने के लिए एक अखबार के संपादक को एक पत्र लिखें। 25 अंक

 

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